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'कृष्ण : अन्तिम दिनों में' के प्रथम संस्करण को पाठकों से व्यापक सराहना मिली, तथा इस पुस्तक के अंग्रेजी अनुवाद 'Krishna - in his last days' को भी पाठकों ने हाथों-हाथ लिया है। इन चार उपन्यासों के अतिरिक्त डॉ. अशोक शर्मा के दो काव्य संग्रह 'श्री कृष्ण शरणम्' तथा 'मेरे पंख मेरा आकाश' भी प्रकाशित हैं।
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आखिरकार एक वर्ष की प्रतिक्षा और बनती बिगड़ती अनिश्चित योजनाओं के पश्चात इस दिसम्बर (2018) में चोपता-तुंगनाथ जाने की योजना सफल हुई। मैंने अपने जीवन मे प्रथम बर्फ की सफेद चादर यहीं देखी थी। सोशल मिडिया एवं अन्य ट्रैवल ब्लॉग पढ़ कर मैंने इस यात्रा सेसंबंधित सारी जानकारियाँ जुटा ली थी।
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सन् 1854 का वाक्या है। 16 वर्ष का एक लड़का शिरडी में एक नीम के पेड़ के नीचे समाधि में बैठा था। जहां वह लड़का समाधि लगा रहा था, उस जगह को अब शिरडी के साईं मंदिर में 'गुरुस्थान' कहा जाता है। इससे पहले शिरडी की एक वृद्ध महिला नाना चोपदार की मां ने उसे देखा था।
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सबसे बड़ा पुराण: यह अठारह महापुराणों में सबसे बड़ा और विस्तृत पुराण है।श्लोक संख्या: इसमें लगभग 81,000 या इससे अधिक श्लोक हैं।प्रमुख खंड: इसके सात मुख्य खंड हैं—महेश्वर, वैष्णव, ब्रह्म, काशी, अवंती, नागर और प्रभास।
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प्रेरणा: वेदों और अन्य पुराणों की रचना के बाद भी जब वेद व्यास जी को मानसिक शांति नहीं मिली, तब नारद मुनि ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और भक्ति का गुणगान करने वाला ग्रंथ लिखने की प्रेरणा दी।संरचना: इस महापुराण में 12 स्कंध, 335 अध्याय और लगभग 18,000 श्लोक हैं।
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प्रेरणा: वेदों और अन्य पुराणों की रचना के बाद भी जब वेद व्यास जी को मानसिक शांति नहीं मिली, तब नारद मुनि ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और भक्ति का गुणगान करने वाला ग्रंथ लिखने की प्रेरणा दी।संरचना: इस महापुराण में 12 स्कंध, 335 अध्याय और लगभग 18,000 श्लोक हैं।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।