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प्रेरणा: वेदों और अन्य पुराणों की रचना के बाद भी जब वेद व्यास जी को मानसिक शांति नहीं मिली, तब नारद मुनि ने उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और भक्ति का गुणगान करने वाला ग्रंथ लिखने की प्रेरणा दी।संरचना: इस महापुराण में 12 स्कंध, 335 अध्याय और लगभग 18,000 श्लोक हैं।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ): महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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रचना (विचार और मौखिक पाठ):महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा की रचना की और उसे बोला था।लेखन (लिखने का कार्य): वेदव्यास जी के बोले गए श्लोकों को भगवान श्री गणेश ने अपने हाथों से लिखा था।
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गीता के वास्तविक शब्द भगवान श्री कृष्ण के हैं, जो उन्होंने महाभारत युद्ध से पहले कुरुक्षेत्र में अर्जुन को दिए थे।महाभारत का हिस्सा: महर्षि वेद व्यास ने इसे महान महाकाव्य 'महाभारत' (भीष्म पर्व) के एक भाग के रूप में संकलित और रचित किया है।श्लोक संख्या: श्रीमद्भगवद्गीता में कुल 700 श्लोक हैं।
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श्रीरामचरितमानस गोस्वामी तुलसीदास द्वारा १६वीं सदी में रचित प्रसिद्ध महाकाव्य है। इसके नायक मर्यादा पुरुषोत्तम राम है और इसकी भाषा अवधी है। इस ग्रन्थ को अवधी साहित्य (हिंदी साहित्य) की एक महान कृति माना जाता है। इसे सामान्यतः तुलसी रामायण या तुलसीकृत रामायण भी कहा जाता है।