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वैसे तो मेवाड़ का इतिहास अति प्राचीन है। पुरातात्त्विक खुदाइयों से पता चलता है कि ईसा पूर्व दूसरी शताब्दी से पहली शताब्दी तक यहाँ नदियों के किनारे मानव बस्तियाँ थीं। महाराणा प्रताप के पूर्वजों का काल गुहादित्य से आरंभ होता है, जिन्होंने बलयी से आकर यहाँ अपने राज्य की स्थापना की। इनके वंशज सुहिल या गुहिलौत कहलाए, जिसकी एक शाखा सिसौदिया कहलाई। आगे चलकर इसी वंश में बप्पा रावल जैसे महापराक्रमी राजा हुए, जिन्होंने 734 से 753 ईसवी तक राज्य किया। विदेशी आक्रमणकारियों से मेवाड़ को स्वतंत्र रखने के लिए प्रबल संघर्ष करने के प्रमाण बप्पा रावल और उनके उत्तराधिकारियों की वीरता की गाथाओं से मिलते हैं। इन्होंने सिंध और मुलतान तक जाकर अरब आक्रमणकारियों को खदेड़ा, ताकि वे भारत-भूमि पर आगे बढ़ने का साहस न करें।